कड़वा चौथ Oct30

कड़वा चौथ...

अपने आशियाने में कड़वा चौथ तो बिना चाँद के फिर से कड़वा ही रही… जिनका शक्कर रहा उनके लिए घी-शक्कर..  

मेरा गाँव Oct27

मेरा गाँव...

कल गाम गये थे- लालगंज, बड़ा प्यारा सा गाम है मेरा…पश्चिम में कमला नदी है…पूरब में लखनदेई नहर….उत्तर में रास्ट्रीय राजमार्ग और दक्षिण में रेलमार्ग…..बिच में छोटा सा गाम….| गाम का एक छोटा सा पुस्तकालय भी है | साहित्य साधकों का गाम है लालगंज | कभी न्याय...

जिन्दगी का रंगमंच Oct25

जिन्दगी का रंगमंच...

  आज 27 के हो गये हम | विधाता लिखित नाट्य को जिन्दगी के इस रंगमंच पर मैं पिछले 9861 दिनों से अभिनय कर रहा हूँ….236664 घंटे हो गये हैं….समय के साथ अभिनय में संजीदगी बढती जा रही है….दर्शक बढ़ रहे हैं…श्रोता बढ़ रहे हैं….अभिनेता-अभिनेत्री बढ़ रहे हैं…..पर्दा...

जन्मदिन Oct25

जन्मदिन...

“जेरे गर्दू, उमर अपनी दिन-ब-दिन बढती गयी… जिस कदर बढ़ते गये हम जिन्दगी घटती गयी” अब आज की बात ये है की आज के हीरो हम हैं, पूरा सेलिब्रेटी वाला फील आ रहा है….आज के दिन पैदा क्या हो गये लग रहा जैसे कोई पुरस्कार मिल गया है…सुबह से बधाईयों का ताँता लगा हुआ है….संचार के सभी...

पटना में मेला Oct20

पटना में मेला...

साँझ में गये थे मेला घुमने | बहुत आनंद आया, पूरा पटना भक्तिमय है….धिया-पुता-नेना-जवान-बुढा सब सड़क पर नया-नया कपड़ा पहन के घूम रहा है….इस बार पटना की रौनक बदल गयी है..एक ही सीजन में दो दो महा अनुष्ठान चल रहा है…..जगमगाते डिज़ाइनर पंडाल, उसपर कानफाडू लौडिस्पीकर पर रेडिमेड...

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