खलिहान से लाइव- गाम-घर के खिस्सा Dec31

खलिहान से लाइव- गाम-...

दिसंबर के महीने में गाँव काफ़ी खूबसूरत हो जाता है | यह एक ऐसा वक़्त होता है जब चारो तरफ़ हरियाली ही हरियाली दिखाई देती है, मक्का-गेहूँ-आलू-गोभी सब मिट्टी को हरियाली से ढँक रहे होते हैं….| घने कोहरे के बीच दिन के दुसरे पहर में बड़ी मशक्कत के बाद भगवान सूर्य अलसाये से दिख पड़ते हैं | कपकपाती...

तेरी याद Dec25

तेरी याद...

  मैं आज भी तेरी याद में अक्सर जब तन्हा होता हूँ, रो लेता हूँ | कभी तेरी कोई तस्वीर किसी पुरानी किताब में मिल जाती है, कभी पुराने बक्से में तेरी चिट्टी, कभी तेरा कोई तोहफा मिल जाता है, सोचता हूँ कितना अच्छा वक़्त था वो………….कभी सोचा ही नही था की तुम्हारे बिना भी...

चुनाव Dec08

चुनाव

चुनाव अब शहरों में नहीं होता, गाँव का रंग देखो, अभी चुनावी रंग में इन्द्रधनुष बना हुआ है | कच्ची-पक्की टूटी-फूटी सड़कों पर भोपूं लगाये रिकार्डेड जयकारों के संग गाड़ियाँ दौड़ रही है | पान-खैनी-चाय दुकान से लेकर खेत-खलिहान पगडंडियों पर भी बात-चीत का मुद्दा राजनीति ही है | सब अपनी अपनी हाँक रहे हैं...

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