ख़जूर May17

ख़जूर

सूरज डूबने को है और उगते चाँद को बदरी लील गया है। शाम अंधेरी रात सी गहरा गयी है। हवाओं का रूख भी काफ़ी वहशी है। घनघोर गर्जनाओं और कड़क बिजली के संग बारिश की संभावना है। फ़ल से लदे ख़जूर के पेड़ झूल रहे हैं, ऐसा लग रहा जैसे मानो कोई स्त्री अपने छठे-सातवें महीने में हो, क़मर पर बेटी को धरे जिसके बाल...

किसानी सरदर्दी May16

किसानी सरदर्दी...

खलिहान से लाइव आज पकड़ी दयाल में हूँ, यह पूर्वी चंपारण का एक प्रखंड है । यहाँ हमारे साथ 750 किसान जुड़े हुए हैं, और इन किसानों की अपनी कंपनी है- उदय कृषक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (www.ukpcl.in)। सभी मक्का, धान, गेहूँ उत्पादक हैं। सुबह से अकौना, थरभीतिया, नवादा आदि कई गाँव घूमा, खेत-पथार देखा,...

बदलाव May16

बदलाव

परिवर्तन के दौर में गाँव में पौराणिक रस्मों-रिवाज और आधुनिक तौर-तरीकों का संगम सामाजिक कैनवास पर गाँव का नया चित्र उकेर रहा है। मैं इस वक़्त पकड़ी दयाल में हूँ, शादियों का मौसम है। उस जमाने में जब शादी के लिए रसूखदारों के शहजादे रथ पर निकलते थे तो घुड़सवारों का एक जत्था आगे आगे चलता था, ढ़ोल-तासे...

गाम, आम और दादीमां May14

गाम, आम और दादीमां...

दालान से लाइव जुड़-शीतल ख़त्म होते ही दादीमां की दिनचर्या बदल जाती है, वैसे ये कोई नई बात नही है, मौसम के अनुसार उनका दिनचर्या सालोभर बदलते रहता है | जाड़े में ऊन-काँटा पर सूखे हाथों की झूलती नसें थिरकती है, गर्मी में आम-आचार, मुंग-अरहर-सरसो, बरसात में आलय की साफ़-सफाई, खेत से सरसो, मिर्ची आया तो...

पिजड़े में सुग्गा May12

पिजड़े में सुग्गा...

“बेपरवाह क्या हुए, पहले से ज्यादा रोमांटिक हो गये हो अरूण। इस जिंदा-दिली का राज क्या है?” “कुछ नहीं प्रिया, पिजड़े में सुग्गा मीठा बोलती है, अंडा नहीं देती ना !”     आज़ादी जिन्दगी...

Home Page