दिवाली Oct30

दिवाली

​ गाम की दिवाली अब नसीब नहीं होती….और शहर की यह चाइनीज दिवाली रास नहीं आती । बस यादों में सिमट कर रह गयी है । दादीमाँ मिट्टी की दिवारी (दीया) बनाती थी, हम बाँस के खोपलैया को ताड़ में गूँथ कर हुक्कालोली बनाते थे । बाद में दर्जी के यहाँ गेनी (कपड़े के टुकड़ो को बॉल की तरह बनाकर लोहे के ताड़...

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