भाग-1.  मैं, नेहा और जलेबी May25

भाग-1. मैं, नेहा और जलेबी...

भाग-1. मैं, नेहा और जलेबी       ये उन दिनों की बात है जब पैरों में कोई लेक्सो का हवाई चप्पल होता था, जिसपर कछुआ छाप से थोड़ा जलाकर हम निशान बना देते थे कि कहीं बदला ना हो जाये, घुटने से दो बिलांग छोटी बुल्लू (ब्लू) कलर की पैन्ट होती थी, जिसमें जिप की जगह बटन होता था क्यूंकि जिप में अक्सर मेरा फंस जाया करता था और उस समय उस उमर में अन्दर ‘वो’ पहनने की जागरूकता नहीं थी, रंगीन गंजी होता था और इन्द्रधनुष रंग का हाफ शर्ट | गोरे बदन पर गंजी के नीचें गंजी का निशान बड़ा प्यारा लगता था, अक्सर अकेले गाछी में जलेबी खाते खाते हम दोनों के एक दुसरे के निशान में ‘मैं ज्यादा गोरा….मैं ज्यादा गोरी’ करते रहते थे | शर्ट के बांह से बगलों में...

पोसिया Feb20

पोसिया

गाँव के पूरब नदी किनारे मुसहर वस्ती थी, ५ बेटियों के बाद विदेसर मुसहर को जुड़वाँ बेटा हुआ – टिंगा मारी और सफल, लोग प्यार से टिंगा मारी को टीमा और सफल को सुफला बुलाने लगे | विदेसर को जब आठवें संतान की प्राप्ति हुई तो उसकी बड़ी बेटी भी माँ बन चुकी थी | आठवें बच्चे को जन्म देते ही विदेसर की...

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