ग्लोबल शेपर्स कम्युनिटी के क्यूरेटर्स के वार्षिक बैठक Aug22

ग्लोबल शेपर्स कम्युनिटी के क्यूरेटर्स के वार्षिक ब...

यूरोप ख़ूबसूरत है और यूरोपियन और भी ज्यादा | मेरे इस तजुर्बे का पहला पडाव था जिनेवा | पटना से दिल्ली, दिल्ली से जेद्दा और जेद्दा से जिनेवा | अवसर था वर्ल्ड इकनोमिक फोरम के ग्लोबल शेपर्स कम्युनिटी के क्यूरेटर्स के वार्षिक बैठक का | कई सवाल थे, झिझक थी, अनजानेपन का डर था, मैं गाँव का छोड़ा और यह युरोप का शहर, घंटों अंग्रेजी बतियाने वाले लोग…. | जब हवाईअड्डे से कदम निकाला तो भीड़ में मैं ही सिर्फ अकेला था | कई भाषाओं में लोग बतिया रहे थे और मैं हिंदी को तरस रहा था | होटल जाने के लिए १० नंबर की बस मिलेगी बस इतनी ही सूचना मैं पिछले एक घंटे में जमा कर पाया था | टिकट काटने के लिए एक मशीन थी और उसमे भाषा फ्रेन्च या शायद जर्मन | यहाँ स्विट्ज़रलैंड...

सर्वाधिक किताब पढने वाले पाठकों को मिलेगा ‘पंडित श्यामंनद झा स्मृति पाठक’ सम्मान Jul27

सर्वाधिक किताब पढने वाले पाठकों को मिलेगा ‘पंडित श...

सर्वाधिक किताब पढने वाले पाठकों को मिलेगा ‘पंडित श्यामंनद झा स्मृति पाठक’ सम्मान संस्कृत में एक कहावत है – स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते | विद्वानों की सर्वत्र पूजा होती है | हमारे यहाँ लेखकों को सबसे बड़ा विद्वान माना जाता है | और लेखक सर्वाधिक सम्मानित भी होते हैं | मिथिला एक ऐसी उपजाऊ पावन भूमि है जहाँ अनादि काल से महान लेखकों का जन्म होता रहा है | जब कोई पोथी प्रकाशित होती है तो लेखक का सामाजिक मान-सम्मान बढ़ता है, प्रकाशक को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है, परंच पाठक को ? पाठक सदा अज्ञात रह जाता है | वर्तमान समय और परिवेश के आधुनिकीकरण में पाठकों का समुदाय विलुप्त सा हो गया है, लोग अपने काम मात्र की जानकारी इन्टरनेट पर खोजकर...

चंपारण के खेत-खलिहान और बीहड़ों से Jul05

चंपारण के खेत-खलिहान...

चंपारण के खेत-खलिहान और बीहड़ों से पिछले ५ दिन से चंपारण में था, परसों पटना लौटा | पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के अलग अलग प्रखंडों के तक़रीबन १५-२० गाँवों में किसानों से मिला | बहुत कुछ सिखने समझने को मिला | यहाँ गाँवों की स्थिति आज भी काफ़ी बुरी है, खासकर के जो गाँव जिला मुख्यालय से दूर है | कई...

गाँव की बात Jul03

गाँव की बात...

खलिहान से लाइव कल चोरमा गाँव से गुजर रहा था तो महिलाओं की टोली खेत की पगडंडियों पर सर पर छोटी-छोटी टोकरी लिए गाना गाते हुए चली आ रही थी | उत्सुकता हुई, रूककर पूछा | “माटी लेकर आ रहे हैं साहब, इस माटी से चूल्हा बनेगा और भीत को लिपेंगे….भीत समझते हैं ना ? कच्चा घर” आज अधिकांश घर गाँव में...

बेतिया, पश्चिमी चंपारण Jun30

बेतिया, पश्चिमी चंपा...

खलिहान से लाइव इस वक़्त मैं पश्चिमी चंपारण के खेत-खलिहानों में घूम रहा हूँ | पश्चिमी चंपारण में गन्ने कि खेती सर्वाधिक होती है, चीनी मिलें भी है | किसानों को इससे अच्छी आमदनी हो जाती है, हालांकि झुण्ड के झुण्ड नीलगायों के आक्रमण की वजह से किसानों को काफ़ी नुकसान होता है | गन्ने के अलावा यहाँ...

बचपन और बरसात Jun27

बचपन और बरसात...

आज सुबह से ही मौसम काफ़ी अच्छा था, घर से ऑफिस के लिए अभी निकला ही था कि बारिश शुरू हो गयी, सामने एक मकान था तो फटफटिया खड़ा कर छज्जे के नीचें शरण लिया, काफ़ी देर तक बारिश होती रही, रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी | रास्ते पर कुछ स्कूली बच्चे छप-छप कर रहे थे, दाहिने तरफ़ गर्ल्स हॉस्टल कि छत पर...

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