ख़ुशी – तेरे नाम एक खुला खत Dec26

ख़ुशी – तेरे ना...

​ ख़ुशी कैसी हो ? तेरे नाम से पहले कोई विशेषण अच्छा नहीं लगता मुझे | मुझे सिर्फ तुम ‘तुम जैसी’ ही अच्छी लगती हो | पिछले कुछ दिनों से जिस्म कि तकलीफें बढ़ गयी थी, लोग-बाग़ के साथ साथ आलमारी में लगा सीसा भी शिकायत करने लगा था | दिल कि तकलीफों को तो कोई नहीं देखता ख़ुशी पर जिस्मानी तकलीफें सब को नज़र...

तुम्हें याद है ?? Dec25

तुम्हें याद है ??...

आज फिर से २५ दिसम्बर है, तुम्हें याद है ? मेरे लिए तो ये दिन कई मायनों में खास है, तुम्हारे लिए भी होगा पर हमारे लिए ? हमारे लिए ये वो दिन है जब हमने एक दुसरे को आखिरी बार स्पर्श किया था और फिर हमेशा के लिए अपने पतवार को अलग मोड़ लिया था | ज़ेवियर में मोमबत्ती जलातेवक़्त हम कैसे पति-पत्नी की तरह...

प्यार-व्यार Dec20

प्यार-व्यार

“अदना सा तो सपना है आ ऊहो पर हंगामा है । बोलता है संतुष्ट रहो; ईहो कोई बात है, काहे रहें? है ही का हमरे पास, एगो छोटका गो कमरा, एगो अखड़ा खाट आ एगो पड़ोसी का जंगला….गाम में एगो कठही गाड़ी था ऊहो बाबूजी बेच दिए ।” मैं चौधरी जी के दुकान पर प्याज चुनते हुए बड़बड़ाये जा रहा था, ध्यान ही नहीं दिया की पीछे जंगला वाली भी तेल लेने आयी है । वो सब सुन ली थी । नाक-भौंह सिकोड़े हुए चेहरे की भंगिमा बनाकर विष्मय प्रकट की । मैं अपने ही सर पर पीछे से एक हाथ लगाया…’साला ई नौकरी के फ्रस्ट्रेशन में कहीं भी कुछो बक देता हूँ ।’ पाटलिपुत्रा में उसका घर मेरे घर के ठीक सामने था, जंगले के पास उसका स्टडी-टेबल था । मेरा कमरा भी यही था,...

अधूरा प्रेम Sep10

अधूरा प्रेम...

​ कल रात एक कविता लिख रहा था, “चाँद लिपटा सो रहा बादलों की चादर में । आधी रात बाकी है, घड़ी भी रूठी है। आज फिर तेरी याद में रतजगा है ।” कविता पूरी नहीं हुई, मैं पुराने वक़्त में खो गया । और कमाल तो देखो आज पूरे 1051 दिन बाद सुबह-सुबह मेरी दुआ कबूल हो गयी ।...

इश्क में नौटंकी‬ Jun13

इश्क में नौटंकी‬...

“तेरी धमनियों में मेरे ही नाम का द्रव बह रहा है अंजलि, यकीन ना हो तो अपने लहू का लिटमस टेस्ट करवा के देख” “अब इसका क्या मतलब?? ये फिर से कौन सी कह्मुकरी है कृष्णा?“ “तुझे तो हमेशा ही मेरा प्यार झूठा लगता है….खैर रहने दे…तू नहीं समझेगी कंभी….जब मैं नही रहूंगा तो याद आएगा”...

ख़जूर May17

ख़जूर

सूरज डूबने को है और उगते चाँद को बदरी लील गया है। शाम अंधेरी रात सी गहरा गयी है। हवाओं का रूख भी काफ़ी वहशी है। घनघोर गर्जनाओं और कड़क बिजली के संग बारिश की संभावना है। फ़ल से लदे ख़जूर के पेड़ झूल रहे हैं, ऐसा लग रहा जैसे मानो कोई स्त्री अपने छठे-सातवें महीने में हो, क़मर पर बेटी को धरे जिसके बाल...

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