पिजड़े में सुग्गा May12

पिजड़े में सुग्गा...

“बेपरवाह क्या हुए, पहले से ज्यादा रोमांटिक हो गये हो अरूण। इस जिंदा-दिली का राज क्या है?” “कुछ नहीं प्रिया, पिजड़े में सुग्गा मीठा बोलती है, अंडा नहीं देती ना !”     आज़ादी जिन्दगी...

फॉस्फोरस May10

फॉस्फोरस...

एक बार एक गणित को रसायन से इश्क़ हो गया । बात बढ़ी तो पासपोर्ट बना, वीजा/वीसा मंगवाया….मुलाकातें हुई…मुक्कालातें हुई …। गंधयुक्त वीकर में कुछ प्रयोग हुआ, कुछ हलचल हुआ । एक मिसाइल संतति उत्पन्न हुआ । अब रोपा पेड़ बबूल का तो नीम कहां ते होई ! मिसाइल अभी से फॉस्फोरस मूतते चलता है...

देहाती-गवाँर May08

देहाती-गवाँर...

गांव की गोरी, “बड़े खच्चर हो तुम…” शहर की छोड़ी, “अच्छा, मैं नमकीन हूँ? चल हट्….कमीना कहीं का…” पटना यूनिवर्सिटी की एक हिंदी स्नातक की छात्रा, “…ओए लप्रेक्‬ समझा है क्या? पूरी ‎उपन्यास‬ हूँ मै….” हमारे मित्र कल से आज तक,...

हमारी जिन्दगी…हमारी पसंद Apr07

हमारी जिन्दगी…...

उस दिन मोना सिनेमा के पास कार पार्क करके मैं और आशीष अंटाघाट सब्जी खरीदने गये थे | वापस आया तो देखा हमारी आल्टो के पीछे एक होंडा सिटी खड़ी थी | एक स्मार्ट सा नौजवान शायद सॉफ्टवेयर इंजिनीयर होगा, ड्राइविंग सीट पर बैठा एक-डेढ़ साल के एक बच्चे को हँसाने में लगा था | ‘ठक-ठक’ शीशा नीचें हुआ | “भाई...

यादों के झरोखे से पुरानी डायरी का एक पन्ना Apr07

यादों के झरोखे से पु...

यादों के झरोखे से पुरानी डायरी का एक पन्ना इश्क में अक्सर लोग बदल जाते हैं, आदतें बदल जाती है, पसंद-नापसंद बदल जाता है | हमें खाने के बाद सौंफ पसंद था और उन्हें मिश्री | पर रेस्टुरेंट से निकलते वक़्त अक्सर एक-दुसरे को अपना प्यार जताने के लिए मैं मिश्री खा लेता था और वो सौंफ खा लेती थी | कल रात...

गुलाबो और यक्ष प्रश्न Mar03

गुलाबो और यक्ष प्रश्...

“बाबा एक यक्ष प्रश्न लेकर आई हूँ….” “बोलो गुलाबो” “ये बसंत के आगमन होते ही वातावरण इतना रोमांटिक क्यों हो जाता है? मेरे वात्सल्य मन में प्रेम बरसाती मेघ की तरह उमड़ने-घुमड़ने लगता है, नाक-कान-आँख-ह्रदय सब प्रेम रस पान को व्याकुल हो जाता है ” “ये ऋतुराज हैं गुलाबो…..इनके मादक राज में...

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