शादी का सिग्नल Mar01

शादी का सिग्नल...

“अजी सुनती हो………….?” “अब क्या हुआ? सुबह-सुबह गला क्यों फाड़ रहे हैं?” “तुम्हारा लाडला व्हाट्सएप्प किया है…” “क्या लिखा है?” “बाबूजी…कल रात फिर से कांड हो गया….शाम में ही आँख लग गयी और बिना खाना खाए ही सो गया…बाबूजी ये सब हमेशा आपके कारण होता...

डैशिंग लड़का Feb14

डैशिंग लड़का...

“कितना डैशिंग लड़का है विवेक…बिल्कुल शाहरुख़ खान लगता है…क्या स्टाइल से टशन में चलता है, और उसके चश्मे तो कसम से कमाल लगता है, जब भी मेरे घर आता है, मैं डीडीएलजे की काजोल सी छुपने लगती हूँ….और नॉलेज तो पूछो ही मत, कुछ भी पूछो उसे सब पता होता है” “मुझे जलन हो रही है रश्मि”...

गुप्तगू Feb03

गुप्तगू...

मैं सब देखता हूँ तुम दोनों मकई के खेत में सरसों की आड़ लेकर क्या गुप्तगू करते रहते हो….कभी आम के पेड़ पर, कभी अरहर में छुपकर….कल तो तुमने हद ही कर दी थी जब तुम गन्ने के खेत में आशिकी फरमा रहे थे….माना मैं सड़क किनारे खड़ा होकर गेहूँ की रखवाली कर रहा…पर मेरी नज़र बहुत तेज...

तेरी याद Dec25

तेरी याद...

  मैं आज भी तेरी याद में अक्सर जब तन्हा होता हूँ, रो लेता हूँ | कभी तेरी कोई तस्वीर किसी पुरानी किताब में मिल जाती है, कभी पुराने बक्से में तेरी चिट्टी, कभी तेरा कोई तोहफा मिल जाता है, सोचता हूँ कितना अच्छा वक़्त था वो………….कभी सोचा ही नही था की तुम्हारे बिना भी...

हल्कू Nov21

हल्कू

  हल्कू मेरे जैसा ही रहा होगा ! आम जिन्दगी में कुछ भी नही बदला है, सिर्फ वक़्त और तारीख़ बदला है | वो दौर प्रेमचंद का था जहाँ पूस की सर्द रात में कपकपाती हाड़ लेकर कोई एक कुत्ते के सहारे मचान के नीचें राख़ पर रात गुज़ार लेता था | आज का दौर चेतन भगत का है, मौसम फ़िल्मी हो गया है, कहीं रातें...

जिन्दगी का रंगमंच Oct25

जिन्दगी का रंगमंच...

  आज 27 के हो गये हम | विधाता लिखित नाट्य को जिन्दगी के इस रंगमंच पर मैं पिछले 9861 दिनों से अभिनय कर रहा हूँ….236664 घंटे हो गये हैं….समय के साथ अभिनय में संजीदगी बढती जा रही है….दर्शक बढ़ रहे हैं…श्रोता बढ़ रहे हैं….अभिनेता-अभिनेत्री बढ़ रहे हैं…..पर्दा...

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