जवानी  Sep07

जवानी 

​माथे की नस दुख जाती है जवानी की गुत्थियाँ सुलझाने में । वो बचपन की मौज कहाँ अब, गांव की पगडंडी और खेत की हरियाली दोपहरिया का कच्चा आम-अमरुद, और पोखर-भिंड पर गाछी में कंचे का खेल ! यहां अब राह पथरीली है, कभी गर्द है, कभी सर्द है, कभी लू में झुलसा देह का दर्द है । यहां अब वक़्त गुजर जाता है,...

पगली का आखिरी प्रेम-पत्र Apr01

पगली का आखिरी प्रेम-...

जो कभी तन्हाई में दिल उदास हो, बेचैन हो, जो कभी भीड़ में मंजिल की डगर मुश्किल लगे, तुम्हेँ मेरी जरुरत होगी | पर घबराना मत, तेरे बक्से में छुपाकर रखा था खुद को, जब मेरी जुल्फों में उलझा था तू, जज्बातों की कोई पुरानी पोटली खोलना, उन खतों का हर अल्फाज़ तेरा गीत गुनगुनाएगा, तू जरुर मुस्कुराएगा,...

ईश्क Mar31

ईश्क

मुझे यकीन है कि एक दिन ईश्क जरूर होगा मुझे भी, तुम्हें भी किसी से कहीं पर बेपरवाह बेपनाह...

एक फूल Mar26

एक फूल

एक बाग, हज़ार माली खिला एक फूल जो, सैकड़ों पुजारी ! इस शहर में मंदिरें बहुत है, दरगाह भी है, कब्र भी है | जुड़ा संवारती नवयौवना भी है, इजहारे-इश्क में मशगूल प्रेमी जोड़े भी है | मंत्री भी है, संतरी भी है, शैतानों की की एक वस्ती भी है | भवरें भी हैं, प्यासा बादल भी है, हवा की नज़र भी कुछ अच्छी नही...

उलझन Jan08

उलझन

फिर से वही उलझन, वही उधेड़बुन किंकर्तव्यविमूढ़ अपने कर्तब्य पथ पर | मस्तिष्क में हलचल, मन विस्मित ‘लेकिन…किन्तु…परन्तु’ मैं अग्रसर जनक आपके अनुभव और वक्तव्य पर | मूल्यहीन समाज मूक-बधिर अर्थ विचार, अर्थ व्यव्हार, अहम् युद्ध, विकृत संस्कार | मैं अबोध अज्ञान निस्वार्थ अभिमन्यु, ये कौरव...

इश्क Jan05

इश्क

  तूने इतना जो कहा, “सैय्याँ तू कमाल का, बातें भी कमाल का…” देख मैंने कितनी बातें कह दी…   “इश्क़ में शहादत को तेरी मुस्कुराहट ही काफ़ी थी कातिल… यूँ बेपरवाह गले लगाने की जरुरत क्या है ?” “रंजिश-ए-इश्क़ में यूँही बरबाद हुआ बेपरवाह कसूर फ़क़त इतना सा था- फिक्र हिज्र में...

Home Page