चंपारण के खेत-खलिहान और बीहड़ों से Jul05

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चंपारण के खेत-खलिहान और बीहड़ों से

चंपारण के खेत-खलिहान और बीहड़ों से

पिछले ५ दिन से चंपारण में था, परसों पटना लौटा | पूर्वी और पश्चिमी चंपारण के अलग अलग प्रखंडों के तक़रीबन १५-२० गाँवों में किसानों से मिला | बहुत कुछ सिखने समझने को मिला |

यहाँ गाँवों की स्थिति आज भी काफ़ी बुरी है, खासकर के जो गाँव जिला मुख्यालय से दूर है | कई जगह सड़कें नहीं हैं, फूस की छत और भीत की दीवालों से बने आशियाने हैं | सामाजिक खाई बहुत गहरी है, किसी के पास १०० एकड़ जमीन है तो किसी के पास जमीन है ही नहीं | अधिकतर किसान हल-बैल से खेती करते हैं | तकनीक से कोशों दूर हैं |

एक गाँव गया था बैरिया प्रखंड में, किसानों ने बताया कि उनके गाँव में आज से ५-७ वर्ष अपने ही पंचायत के दो जातियों की आपसी लड़ाई में एक ने गंडक के बांध को काट दिया, नतीजन आज गंडक की धारा ही बदल गयी और पूरा गाँव कट कर बह गया | आये दिन मगरमच्छ देखने को मिलते हैं, परसों एक बकरी चराती महिला को जख्मी कर दिया था | गाँव के अधिकतर युवा बाहर शहर में नौकरी करते हैं | गाँव से पलायन की रफ़्तार काफ़ी अधिक है | रामगढ़वा प्रखंड में एक किसान कृष्णा राम ने बताया कि मिटटी खोदने से कुछ नहीं मिलने वाला, वहां शहर में हर महीने के आखिरी में १० हज़ार जेब में रहता है | लोगों की जुबान काफ़ी तल्ख़ हैं | महिलाओं कि स्थिति और भी बुरी है | मुसहर जाति की अधिकांश महिलाएँ मजदूर हैं जिन्हें ४०-१०० रूपये 6 घंटे की मजदूरी मिलती है, वहीं पुरुषों को २००-२५० रूपये ८ घंटे कि मजदूरी मिलती है | सामान्यतः मुसहर के अलावा बाकी लोग अपनी महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलने देते हैं |
कुछ अच्छी चीजें जो देखने को मिली वो ये है कि पुरे बिहार में शायद सबसे अधिक हरियाली चंपारण में है | भयानक जंगल सब हैं, कई जगह जंगलों के बीच से सड़क गुजरती है | नदी और नहर बहुत हैं | पानी का स्तर काफ़ी ठीक है, ४०-५० फुट गहराई पर पानी मिल जाता है |

मैंने उदयपुर के जंगलों को देखा, कभी इन जंगलों में दस्युओं का ठिकाना होता था | बेतिया स्टेट की गाछीयों को देखा | सरेयामन नदी देखा, जिसके दोनों तरफ जामुन के जंगल है, इस नदी की मछलियाँ बहुत स्वादिष्ट होती है | जहाँ सामान्य तालाब की मछलियों की कीमत २००/- रूपये प्रति किलो होती है वहां सरेयामन की मछलियों की कीमत २५०-३००/- रूपये प्रति किलो होती है | एक जगह सेवई का गृह उद्योग देखा | और भी बहुत कुछ देखा, आप उन्हें इन तस्वीरों में देखिये |