जलवायु परिवर्तन : समस्या एवं समाधान

#खलिहान_से_लाइव

हिमालय के नजदीक रहने के कारण बिहार सबसे अधिक जलवायु परिवर्तन से प्रभावित हो रहा है | जलवायु परिवर्तन का कोई विकल्प नहीं है, एक ही उपाय है कि हम अधिक से अधिक पेड़ लगायें, कार्बनडाईऑक्साइड और कार्बनमोनोऑक्साइड को वायुमंडल में कम से कम उत्सर्जन करें | रिन्यूएबल एनर्जी के श्रोतों का व्यव्हार करें | किसान इसमें मुख्य रोल अदा कर सकते हैं | कीटनाशकों की जगह जैविक उपादानों एवं किट रक्षकों का प्रयोग, डीजल पम्पसेट की जगह सोलर पम्पसेट का उपयोग, कृषि अपसिष्टों का जैविक कम्पोस्ट बनाकर जलवायु परिवर्तन के नियंत्रण में अपना गंभीर योगदान दे सकते हैं | चूँकि मौसम तेजी से बदल रहा है तो कम दिनों का वैरायटी सही समय पर लगाकर उपज ले सकते हैं परन्तु कोई स्थायी समाधान या विकल्प फिलहाल मेरी जानकारी में किसान के पास नहीं है | तकनीकीकरण से लागत कम कर सकते हैं और उन्नत किस्म के सहनशील बीज लगाकर तत्कालिक समाधान किया जा सकता है | जैसे अब धान में बाढ़ और सुखाड़ दोनों से सहनशील बीज का किस्म उपलब्ध है |
मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखकर फसल क्षति प्रबंधन कर सकते हैं । और हमें ये सब करना ही होगा, कोई उपाय भी नहीं है । क्या पता कल सांस लेने के लिए ऑक्सीजन खरीदना पड़े !
हम हर चीज की कीमत चुकाते हैं किसी ना किसी रूप में, सिर्फ साँसों का नहीं चुकाते क्यूंकि आज तक प्रकृति ने कीमत माँगा नहीं | पर हमें चुकाना चाहिए, अगर एक साल में बस दो पेड़ लगा लें तो साँसों को सुरक्षित किया जा सकता है | मैं अपने जन्मदिन पर हर साल एक पेड़ लगाता हूँ, अब तो दोस्तों को भी जन्मदिन पर पेड़ गिफ्ट करना शुरू किया हूँ | मुझे विश्वास है कि एक दिन हर कोई ऐसा करेगा और हम अपनी धरती को डूबने से बचा लेंगे | अगर आज हम अपने कल को सुरक्षित नहीं किये तो हमारी आनेवाली पीढ़ी शायद इस खूबसूरत दुनियाँ को नहीं देख पाएगी |
2010 में काफ़ी गर्मी पड़ी थी और इसके बाद अगर आप गौर करेंगे तो २०१४ से हर साल गर्मी पिछले साल से अधिक पड़ने लगी | २०१६ सबसे गर्म वर्ष रहा | जो कभी पृथ्वी का 0.1 % क्षेत्र सबसे गर्म होता था आज 14 % हो गया है | ठंड घटने लगा है और गर्मी बढ़ने लगी है | पिछले साल जुलाई में कुवैत का तापमान 51 डिग्री सेल्सियस हो गया था, अगस्त में कई जगहों पर उडती हुई चिड़िया धूप से झुलस कर जमीं पर गिरकर मर गयी | कई जगहों पर सड़क का अलकतरा पिघलने लगा | २०१५ में २३३० लोग इंडिया में लू लगने से मर गये | 28 मई 2017 को पाकिस्तान का तुर्बत शहर का तापमान 54 डिग्री सेल्सियस हो गया | ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ रही इस गर्मी का 93% समंदर में जाता है नतीजन समंदर गर्म हो रहा है और फिर समंदर की गर्मी सुनामी और हुरीकेंन बनकर तबाही लाता है | एक डिग्री से अगर तापमान बढ़ता है तो 7% से वास्पीकरण बढ़ जाता है नतीजन बेमौसम बेवक्त भयंकर बारिश होती है | गर्मी से ग्लेसियर पिघलता है और फिर बाढ़ | पिछले कुछ सालों से बेमौसम बरसात आम बात हो गया है | किसान मौसम की मार से परेशान है | पिछले साल मक्के में परागण के समय बेमौसम बारिश हो गयी नतीजन गेहूँ मक्का दोनों बर्बाद गया | इस साल ठंढ लंबे समय तक रह गया नतीजन जिन्होंने भी मक्के की अगेती खेती की थी परागण ढंग से नहीं हुआ और कटनी के समय अभी इतना बारिश हुआ है कि फसल में नमी बढ़ गयी है, फंगस बढ़ गया है और अब कोई ऐसा फसल खरीदने को तैयार नहीं है । खेती में कीड़े मकोड़े की समस्या बढ़ रही है, क्यूंकि गर्मी की वजह से अंडे से लार्वा जल्दी तैयार हो जाता है और अपनी जीवनवधि में अधिक संतति पैदा कर लेता है |
जलवायु परिवर्तन एक ऐसी गंभीर समस्या बनकर उभर रही है जिसके लिए अगर आज अब सचेत नहीं हुए तो शायद हम हम एक दो पीढ़ी के बाद धरती को खो देंगे |
हमने किसानों को कीटनाशकों का वायुमंडल पर प्रभाव और स्वास्थ्य पर प्रभाव के प्रति जागरूक किया है और फेरोमोन ट्रैप, पक्षी बैठका, पिला बोर्ड, conservation agriculture आदि तकनीकों के माध्यम से कीटनाशक रहित कृषि को बढ़ावा दिया है |
पूरी तरह से जैविक खेती में अभी थोडा समय लगेगा पर बिहार के किसानों में अब जागरूकता बढ़ रही है | कीटनाशकों का प्रभाव वो अपने स्वास्थ्य पर भी महसूस करने लगे हैं |
आइये साथ दीजिये धरती को बचाने में, हमने कोशिस शुरू की है, कुछ हाथ मिलने भी लगा है । अभी हमारे साथ आये हैं अंतरराष्ट्रीय संस्था RIMES और भारत सरकार के मौसम विभाग के वैज्ञानिक और हमने शुरू किया कृषि में मौसम के पूर्वानुमान के प्रयोग से क्षति प्रबंधन पर जहानाबाद में किसानों का प्रशिक्षण । ना से थोड़ा भला, सूचना उपलब्ध होगी तो फसल सुरक्षा का प्रयास किया जा सकता है ।

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