डैशिंग लड़का Feb14

Tags

Related Posts

Share This

डैशिंग लड़का

“कितना डैशिंग लड़का है विवेक…बिल्कुल शाहरुख़ खान लगता है…क्या स्टाइल से टशन में चलता है, और उसके चश्मे तो कसम से कमाल लगता है, जब भी मेरे घर आता है, मैं डीडीएलजे की काजोल सी छुपने लगती हूँ….और नॉलेज तो पूछो ही मत, कुछ भी पूछो उसे सब पता होता है”

“मुझे जलन हो रही है रश्मि”

“अरे…इसमें जलने की क्या बात है…वो तुमसे बहुत अलग है…सच कहूँ तो सबसे अलग…एकदम यूनिक और मस्त…इतनी गर्मजोशी से मुस्कुरा कर मिलता है जैसे वीर अपनी ज़ारा से मिल रहा है…उसका कॉलर ट्यून भी..’…मुझको तू मिला है जैसे बंजारे को घर..विवेक को कॉल करने के लिए धन्यवाद…’ मैं तो उसकी फ़ोन उठाने से पहले ही पागल हो जाती हूँ राजेश”

“बंद कर ये फ़िल्मी नाटक रश्मि…ऐसा क्या है उसमे जो मुझमे नही है…तुम्हे उससे कहीं ज्यादा मैं खुश रख सकता हूँ रश्मि..”

“यार राजेश यही तो तेरी प्रॉब्लम है, विवेक कभी ऐसा बोलता ही नही…कहता है आईफोन माइक्रोमेक्स के बारे में नही सोचता…”

“तुम पागल हो गयी हो रश्मि”

“नही राजेश उसमे बात है यार…कल तो मेरा चेहरा स्कार्फ़ से ढंका था फिर भी ऑटो में पहचान लिया था…बोला रश्मि ये इंस्पेक्टर स्टील का फैन है….आँखें नहीं ये सोनी के स्पेशल कैमरे हैं…”

“मैं जा रहा हूँ रश्मि”

“राजेश तुमतो मेरे अच्छे दोस्त हो ना…नाराज क्यों हो गये….मुझे लगता है शायद मुझे विवेक से प्यार हो गया है राजेश….”