Tags

Related Posts

Share This

देहाती-गवाँर

गांव की गोरी, “बड़े खच्चर हो तुम…”
शहर की छोड़ी, “अच्छा, मैं नमकीन हूँ? चल हट्….कमीना कहीं का…”
पटना यूनिवर्सिटी की एक हिंदी स्नातक की छात्रा, “…ओए लप्रेक्‬ समझा है क्या? पूरी उपन्यास‬ हूँ मै….”

हमारे मित्र कल से आज तक, “तुम देहाती-गवाँर लोग हमेशा आउटडेटेड ही रहोगे…”

साहब श्री कृष्ण हैं, तीनों गोपियां साहब के इश्क़ में आज दीवानी है ।