किसानी सरदर्दी

खलिहान से लाइव
आज पकड़ी दयाल में हूँ, यह पूर्वी चंपारण का एक प्रखंड है । यहाँ हमारे साथ 750 किसान जुड़े हुए हैं, और इन किसानों की अपनी कंपनी है- उदय कृषक प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड (www.ukpcl.in)। सभी मक्का, धान, गेहूँ उत्पादक हैं।
सुबह से अकौना, थरभीतिया, नवादा आदि कई गाँव घूमा, खेत-पथार देखा, किसानों से बातचीत हुई ।
 
पिछले 10 दिन से यहाँ दिन को तो काफ़ी गर्मी रहती है पर रातों को अक्सर आँधी-बारिश हो रहा है , नतीज़न मक्के की फ़सल बरबाद हो रही है और अधपके में ही काट रहे हैं । इससे किसान को बाज़ार भाव कम मिल रहा है। इस साल पहले ही नमी के कारण गेहूँ-मकई कम जमा (अंकुरण) था और फिर परागन के समय आँधी-बारिश हो गयी तो फल सही नहीं निकला और अभी जब फसल काटने का समय आया तो फिर से मौसम नाराज । इस साल गेहूँ का भी उपज अच्छा नहीं रहा । हालांकि हमारे कुछ किसान जिन्होंने हाइब्रिड लगाया था उनके गेहूँ का उपज संतोषप्रद रहा । शिवशंकर जी कर्ज में डूब गये हैं, बस इतना कहा- “अगर आज बड़कू परदेश में ना कमाता रहता तो मैं ज़हर खा लेता, अब कमर टूट गयी है बाबू इस खेती-किसानी में…’
 
मैंने किसानों को ढांढस बढ़ाया और धान की तैयारी करने को कहा, जानकारियां दी और उनकी परेशानियों के मकड़जाल को सुलझाते हुए आगे की गांव की ओर बढ़ गया । विजय जी अपनी गाछी में बारहमासा आम दिखाए, मज्जर और फल दोनों है। अच्छा है एक पेड़ तो किचन गार्डेन में भी लग जाएगा । वहीं कृष्ण भोग आम देखा तो रहा नहीं गया, ढेला से एक तोड़ा, स्वाद लिया। रास्ते में नदी पार करते वक़्त एक मल्लाह मिला, काँटा फसा रहा था तो मैंने भी क़िस्मत आजमा लिया, पर मछली का मूड नहीं था, बेइज्जत करके भेज दिया ।
 
टहलते-टहलते रात हो गयी, अभी अतिथि गृह पहुँचा हूँ, बिजली रानी गुस्से में मुँह फुलाकर बैठी है । मैं छत पर चाँद से आज की रात की टोह ले रहा हूँ, शायद आज बारिश नहीं होगी, शायद चाँद को धान के पूरे 130 दिन की ख़बर होगी।
किसानी में भी बड़ी सरदर्दी है।