यादों के झरोखे से पुरानी डायरी का एक पन्ना Apr07

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यादों के झरोखे से पुरानी डायरी का एक पन्ना

यादों के झरोखे से पुरानी डायरी का एक पन्ना

इश्क में अक्सर लोग बदल जाते हैं, आदतें बदल जाती है, पसंद-नापसंद बदल जाता है |

हमें खाने के बाद सौंफ पसंद था और उन्हें मिश्री | पर रेस्टुरेंट से निकलते वक़्त अक्सर एक-दुसरे को अपना प्यार जताने के लिए मैं मिश्री खा लेता था और वो सौंफ खा लेती थी |

कल रात दोस्तों के साथ एक रेस्टुरेंट में खाना खा रहा था | चलते समय मैंने मिश्री उठाई तो दोस्तों को थोड़ी हैरानी हुई |

“तुम मिश्री कब से…?”

“भाई अभी तो विरह के ८३३ दिन ही हुए हैं, इतनी जल्दी आदत कहाँ छूटती है…!!”

सब खामोश, गहरा सन्नाटा और इस सन्नाटे में पटना के ट्राफिक की आवाज़ भी गुम हो गयी |

बाबूजी ठीक कहते हैं- ‘मिलन अंत है सुखद प्रेम का और विरह जीवन का…’  |