तुम्हें याद है ?? Dec25

Tags

Related Posts

Share This

तुम्हें याद है ??

आज फिर से २५ दिसम्बर है, तुम्हें याद है ? मेरे लिए तो ये दिन कई मायनों में खास है, तुम्हारे लिए भी होगा पर हमारे लिए ? हमारे लिए ये वो दिन है जब हमने एक दुसरे को आखिरी बार स्पर्श किया था और फिर हमेशा के लिए अपने पतवार को अलग मोड़ लिया था |

ज़ेवियर में मोमबत्ती जलातेवक़्त हम कैसे पति-पत्नी की तरह प्रभु के सामने सर झुका रहे थे | और वो बाहर में क्रिसमस ट्री के पास तेरी कितनी सारी फोटो खिंची थी मैंने | तूने रखा है संभालकर उसे ?? मेरा वो क्रिसमस वाला तोहफा तो रखा होगा ? एक कॉफ़ी मग पर मैंने तेरे वो सारे बेहतरीन तस्वीरें जो पिछले पांच सालों में संजोया था, डिजाईन से चिपका डाला था, तुम जितनी बार उसे देखोगी हमारा साथ हर बार जी उठेगा | दुसरे मग पर वो सांता क्लॉज़ में मैं और तू….जब तूने रात को बताया कि माँ ने सांता क्लॉज़ के गेटअप में मुझे पहचान लिया तो मैं खूब हँसा था, हम खूब हँसे थे, शायद वो आखिरी बार हम साथ हँसे थे |

अच्छा सच सच बतलाना वो कॉफ़ी मग तुम्हें बहुत खास लगा था या तुम जानती थी कि अब कभी नहीं मिलना है हमें….? तेरे आँखों में नमी थी और कुछ बूंदें टपक कर गालों पर फिसल आया था | कलक्टर हाउस के सामने कितनी आकुलता और बेपरवाही से तूने अपने प्रेमगोश में भींचकर आलिंगन किया था, मुझे तो लगा था कि पुलिस अबकी पकड़कर पक्का थाने ले जाएगी | शुक्र वो ऑटो वाले का जो समय पर पहुँच गया और हम बैठकर भाग निकलें |

वो गोलघर के पास ऑटो में तुमने कितनी बेशर्मी से चूमा था, सबलोग देख रहे थे और वो लड़का कैसे मुझे देख रहा था, और क्या कहा था तुमने जाने दो, कौन सा रोज रोज हमें मिलनेवाला है ये कि इसको याद रहेगा और वैसे भी पूरा चेहरा थोड़ी देखा है | तेरे होठों की उस हठधर्मिता का एहसास आज तक मेरे अधरों पर जी रहा है | ऐसा क्यूँ होता है ख़ुशी कि इश्क में लोग आकुल हो जाते हैं और जुदाई में व्याकुल??

पीएनएम् में हमनें कोई सूप पिया था ना?? शायद…मुझे ठीक से याद नहीं आ रहा है | देख रही हो अब मैं तुम्हें थोड़ा थोड़ा भूलने लगा हूँ | पर मुझे याद है पीएनएम् मॉल की विंडो शॉपिंग और हल्का जलपान के बाद हमलोग पाटलिपुत्रा मैदान में डिजनीलैंड गये थे और तुमने वहाँ कितने गोलगप्पे खाए थे…बाप रे…कैसे तुमने उस दिन उतना गोलगप्पा खा लिया था ?  वो याद है क्या तुम्हें जब तुमने डिज्नीलैंड के पार्किंग में खड़ी बुलेट पर बैठकर फोटो खिंचवाई थी | इश्क में लोग फालतू हो जाते हैं ख़ुशी, कितनी उलजुलूल हरकतें कर लेते हैं |

और शाम में हम फिर साथ साथ बुद्धा पार्क गये थे, रास्ते भर तुम ऑटो में मुझे तंग कि थी, कभी चूमती थी, कभी कंधे पर सर रखकर सोती थी, कभी बाँहों में जकड़ती थी | पूरा ऑटो इश्कमय कर दिया था तुमने | बुद्धा पार्क का भी तो शायद ही कोई कोना छूटा होगा जहाँ तुमनें हमारे प्यार का हस्ताक्षर ना किया हो | शाम को घर जाते वक़्त तुम ऑटो में कितनी बेफिक्री से सो गयी थी, अगर मेरी भी आँख लग जाती तो शायद हम शीतला मंदिर भी जरुर घूम लेते |

और फिर तारीख बदलने से कुछ क्षण पहले तेरा वो कॉल जो हमेशा के लिए मेरी ? या तेरी ? या हमारी जिन्दगी बदल गया |

“गौरव हम अब कभी नहीं मिलेंगे, मैंने राहुल को शादी के लिए हाँ कर दिया है, घर में सबलोग खुश हैं, हमारे सिवा | तू अपना ख्याल रखना | जब तक तू जिन्दा रहेगा, मैं भी जी लूंगी | खुद को संभाल कर रखना | आई लव यू पगले |”