पावन भूमि मिथिला Feb13

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पावन भूमि मिथिला

मिथिला एक मात्र ऐसी पावन भूमि है जहाँ तर्क और दर्शन पान दुकान, चाय दुकान, दारु ठेका, खेत-खलिहान, मछली बाज़ार से गली-सड़क-हाईवे होते हुए शहर के टेबल-कुर्सी-सोफ़ा तक निरंतर समान रूप से सफ़र करता हुआ मिल जाएगा |

अभी कुछ दिन पहले मैं महादेव दर्शन के लिए बस से कुशेश्वर स्थान जा रहा था….काफी भीड़ थी, मुझे तो सीट मिल गयी थी पर बहुत से लोग खड़े थे..मेरा सर दुःख रहा था….मैं अपने हाथों पर सर टीकाकार सोने की कोशिस में था….भाड़े के लिए १०० का एक नोट सिगरेट की तरह मोड़कर ऊँगली में फ़सा रखा था ताकी कंडक्टर बिना चिल्लाये पैसा ले ले….कुछ देर बाद कंडक्टर आया..

“बड़े भाई… नोट को ऐसे नहीं मोड़ते….ये लक्ष्मी हैं….आप इनको इज्जत कीजियेगा तभी ये आपके घर आयेगी…इन्हें सम्मान से जेब में संभाल कर रखा कीजिये और शालीनता से खर्च कीजिये..”

कंडक्टर बोलते हुए पैसा लेकर चला गया पर मेरे कानों में उसकी आवाज़ राह भर गूंजती रही | बड़ा गूढ़ दर्शन की बात कर गया था |

मंदिर पंहुचा तो देखा लम्बी लाइन लगी हुई है और पंडा जी चिल्ला रहे थे….
“बढ़ते रहिये…रुकिए मत…आपके साथ बहुत से लोग चल रहे हैं…आप रुकेंगे तो सब रुक जायेंगे….आगे बढ़ते रहिये…”

यहाँ भी दर्शन….शिव दर्शन के संग दर्शन श्रवन फ्री..

आते वक़्त में दरभंगा से पहले एक जगह बस रुकी हुई थी….एक केला वाला आया “२० के १०….ले लो भाई….केला ले लो….२० के १०…”

“बहुत मंहगा है भाई…”

“सस्ता क्या है इस दुनिया में साहब?”

वो चला गया…फिर एक केला वाला आया….उम्र १४-१५ साल रहा होगा…”३० के दर्जन…..३० के दर्जन…केला ले लो भाई…केला…असली नौगछिया वाला मीठा केला…”

“तुम्हारा तो बहुत मंहगा है भाई, अभी २४ के दर्जन बेचकर गया है…“

“जो चला गया सर वो चला गया….उसके बारे में अब मत सोचिये….जो अभी सामने है उसके बारे में सोचिये….ये अगर चला गया तो अगला पता नही की आयेगा भी की नही…जो मिल रहा है उसका मज़ा लीजिये….आपके लिए २८ का दर्जन दे दूंगा…बोलिए ?”

फिर से तर्कपूर्ण दर्शन….

खैर सफ़र हमारा अभी लम्बा था…पूरब की तरफ रुख किया…रस्ते में जो दिखा वो तो आप खुद ही देख लीजिये…फोटो में देखिये क्या लिखा है…

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