नव वर्ष की शुभकामनाएं Jan01

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नव वर्ष की शुभकामनाएं

हर साल की भांति एक 12 महीने का पूरा वर्ष खत्म हो रहा है और कुछ पल ही में एक नया साल आनेवाला है | ये नया इसलिए है हमारी उम्मीदे नयी है……तो क्यों ना अपनी उम्मीदों में हम थोड़ा पंख लगा दें | जो अभी तक अधूरा रहा उसको पूरा कर लें | अभी तक अगर अपने लिए सिर्फ जिए हैं थोड़ा नीचें झुककर कुछ लोगों को उपर उठा दें |

सरकार सातवाँ वेतन आयोग ला रही है, मंहगाई बढ़ेगी….दिनों-दिन आम आदमी का खर्च का तरीका तो बदल ही रहा है | प्राइवेट कम्पनियों में नौकरीपेशा लोगों की तनख्वाह में कुछ खास इजाफ़ा तो होगा नहीं और मेहनत-मजदूरी खेती-बाड़ी करनेवालों की भी परिशानियाँ बढ़ सकती है | तो क्यों ना हम मिलकर थोड़ी कोशिश करें बिहार की तस्वीर बदलने की…..किसान का उत्पादन बढे, साक-सब्जी, धान-गेहूँ का बाज़ार बढे…हर बच्चे को शिक्षा मिले….हर घर में रौशनी हो….कोई भूखा-नंगा ना सोये…स्वास्थ्य सुविधा सबको प्राप्त हो….| मुश्किल है क्या? अगर हर बिहारी अपनी एक दिन की कमाई और एक दिन का श्रम भी इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए दान कर दे तो मुझे लगता है की बिहार की सूरत तो रातों-रात बदल जाएगी |

लोग जंगली कहते हैं और मेरे समझ से जंगली तो जानवर होता है, वो कहते हैं यहाँ जंगलराज है….अच्छा तो आपको भी नहीं लगता होगा….क्यों ना हम थोड़े जिम्मेदार हो जाये….हम अनुसाशित होकर प्रशासन की मदद करें और उन्हें उनकी जिम्मेदारी निभाने दें | राज्य में शांति-संयम कायम रहे | कोशिश करेंगे तो सब संभव हो जाएगा |

करने को बहुत कुछ है, सिर्फ बातें करने से तो सरकार भी नही बनती….हमने तो रास्ता अख्तियार कर लिया है…आप साथ आयेंगे तभी तो कारवां बनेगा | अकेला चना भांड नही फोड़ सकता, जरुरत है इस चने की पोटली बनाने की | रक्तदान के विज्ञापन में बोलता है- “कर के देखिये अच्छा लगता है…” सच में कभी आप किसी बीमार आदमी को रक्त देकर देखिये, कितना सुकून मिलेगा…बड़ा गर्व होता है की हमने किसी की जिन्दगी बचा ली…..कुछ ऐसा ही लगेगा अगर किसी गरीब बच्चे के सपनों में आप उड़ान भर दें…

२०१५ में एक बड़ा नुकसान हुआ, हमने अब्दुल कलाम साहब को खो दिया, पर उनकी बातें उनके सपने आज भी जिन्दा हैं….क्यों ना हम इस नये साल में संकल्प लें और ५ गरीब बच्चों के सपनों में जान भरकर उनके घर शिक्षा का दीप जला दें, समाज में सहिष्णुता कायम रखें, समृद्धि और खुशहाली से हर आँगन को सजा दें |

कैसे होगा ? नहीं होगा ? आप सहमत हैं तो थोडा एडजस्ट कीजिये ना….सब मुमकिन है….

३६५ दिन की खाली किताब है हमारे पास और वक़्त की स्याही है….क्या लिखना है, ये हमे ही तय करना है….

फ़िलहाल नव वर्ष की शुरुवात हम रौशनी जलाकर अपनी प्यारी सी भतीजी से संग कर रहे हैं….आप सभी मित्रों की ढेर सारी शुभकामनाएं….आपका घर-परिवार सब नव वर्ष में सुख-समृद्धि-शांति की रौशनी में जगमगा उठे….