शादी का सिग्नल Mar01

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शादी का सिग्नल

“अजी सुनती हो………….?”

“अब क्या हुआ? सुबह-सुबह गला क्यों फाड़ रहे हैं?”

“तुम्हारा लाडला व्हाट्सएप्प किया है…”

“क्या लिखा है?”

“बाबूजी…कल रात फिर से कांड हो गया….शाम में ही आँख लग गयी और बिना खाना खाए ही सो गया…बाबूजी ये सब हमेशा आपके कारण होता है…आप लड़कियों से दोस्ती से मना करते हो ना…! काश मेरी भी एक गर्लफ्रेंड होती…!! कम से कम ९ बजे रात को मिस्काल देती फिर बात होती- ‘बेबी डिनर हो गया ? मेरा बाबु सो गया था क्या? उठ जा ना बेबी…रात को खाली पेट नहीं सोते…एक चिड़िया के बराबर मांस कम हो जाता है…उठ जाओ न सोना प्लीज…थोडा सा ही खा लो…’ पर बाबूजी बेपरवाह किस्मत…तन्हाई में अक्सर अस्मत लूट लेती है…नींद भी फिरकी ले लेता है….बुरे दिन आ गये हैं…मोदी अंकल भी झूठ बोल गये की अच्छा दिन आएगा…”

“चिंटू के पापा, आपका बेटा शायराना हो गया है…”

“मेरा बेटा है….रग-रंग में प्रेम भरा हुआ है….बिना लड़की दोस्त के भी इतना सटीक कल्पना किया है….खैर छोड़ो…. मोहब्बत की गहराई आप क्या जानो चिंटू की मम्मी….शब्द संबोधन और एहसास सब अलंकृत हो जाता है…”

“नालायक है आपका बेटा….कल फिर लिखेगा- ‘बाबूजी कांड हो गया फिर से..बिस्तर पर सूसू हो गया..’. शुक्र है बाथरूम से आकर आवाज़ नही लगाता है.-‘मम्मी…….धो दो….या मैं पैंट पहन लूं’..“

“तुम ही बिगाड़ी हो…”

“आप पर गया है, पतलून की नाड़ भी नहीं बाँधने आता है”

“हूंह”

“अब मेरा मुँह क्या ताक़ रहे हैं….बेटा शादी का सिग्नल दे रहा है…कुछ भी खुद से नही कर सकता…पंडित जी को फ़ोन करिये….लड़की ढूंढिए”

“भक्क, अभी बच्चा है”

“चिंटू के पापा उसकी उमर में मेरे दो बच्चे थे….जाइये….इस घर मैं ही एक मर्द हूँ…सारा काम मुझे ही करना पड़ता है….”

“तुम तो दिल पर ले लेती हो चिंटू की मम्मी….मैं इमोशनल हो जाता हूँ ना..”

पंडित जी को फ़ोन- ‘ट्रिन..ट्रिन…”

“हेल्लो”