तेरी याद Dec25

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तेरी याद

 

मैं आज भी तेरी याद में अक्सर जब तन्हा होता हूँ, रो लेता हूँ | कभी तेरी कोई तस्वीर किसी पुरानी किताब में मिल जाती है, कभी पुराने बक्से में तेरी चिट्टी, कभी तेरा कोई तोहफा मिल जाता है, सोचता हूँ कितना अच्छा वक़्त था वो………….कभी सोचा ही नही था की तुम्हारे बिना भी जिन्दगी होगी…………कहाँ चली गयी तुम? क्यों चली गयी तुम? मैं तो आज भी वही हूँ, वैसा ही हूँ……..वही खड़ा हूँ जहाँ तू छोड़कर गयी थी….वो साथ गुजारे हर एक पल आज भी एक ख्वाब से लगते हैं मुझे…..वो रात रात भर तुझे सुनना…तेरी मुस्कुराहटें……मुझे देखते ही तेरे चेहरे की वो खिलखिलाहट….वो दौड़कर मुझसे लिपट जाना…..सब कल की ही तो बातें हैं….
बेपरवाह तो मैं था, तुझे तो फिकर थी…फिर कभी आती क्यूँ नही ? आज भी वही मेरा ठिकाना है, वही पुराना फ़ोन और वही नंबर है, वही ईमेल, वही सोशल प्रोफाइल है…..कभी तो आवाज दो….कितने साल गुजर गये…..तेरी आवाज आज भी नही भूला हूँ…एक बार फिर से आवाज दो ना…..तेरी यादों को कैसे संभालूँ मैं ? जिन्दा हूँ पर जिन्दगी नहीं है, बंदा हूँ बंदगी नही है, ना मेरे लिए खुदा है न इबादत है, अधूरी आवारगी है और तिजारत है….दीवाना तेरा आज भी जब आईने में देखता है, अपनी नज़र में तेरी अक्स देखता है, फिर पूछता है- कैसी दिल्लगी थी? ये कैसी दिल्लगी है? मुझे तो तुझे सच्ची मुच्ची का इश्क हो गया रे…………………..
“दिले नादान से मत पूछो मोहब्बत ने क्या कहर ढायी है….
‘बेपरवाह’ दीवाने की ताउम्र अब रुसवाई है…”