सर्वाधिक किताब पढने वाले पाठकों को मिलेगा ‘पंडित श्यामंनद झा स्मृति पाठक’ सम्मान

सर्वाधिक किताब पढने वाले पाठकों को मिलेगा ‘पंडित श्यामंनद झा स्मृति पाठक’ सम्मान

संस्कृत में एक कहावत है – स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान सर्वत्र पूज्यते | विद्वानों की सर्वत्र पूजा होती है | हमारे यहाँ लेखकों को सबसे बड़ा विद्वान माना जाता है | और लेखक सर्वाधिक सम्मानित भी होते हैं | मिथिला एक ऐसी उपजाऊ पावन भूमि है जहाँ अनादि काल से महान लेखकों का जन्म होता रहा है | जब कोई पोथी प्रकाशित होती है तो लेखक का सामाजिक मान-सम्मान बढ़ता है, प्रकाशक को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है, परंच पाठक को ? पाठक सदा अज्ञात रह जाता है |

वर्तमान समय और परिवेश के आधुनिकीकरण में पाठकों का समुदाय विलुप्त सा हो गया है, लोग अपने काम मात्र की जानकारी इन्टरनेट पर खोजकर जरुरत पूरा कर लेते हैं, वो शौक से फुरसत में किताबें नहीं पढ़ते, टेलीविजन देखते हैं, पार्टी करते हैं, गानें सुनते हैं | गाँव-घर का माहौल बदल गया है, बच्चे अपने स्कूल-कॉलेज के विषय-वास्तु के अतिरिक्त कोई किताब पढना पसंद नहीं करते हैं | समाज के विकृत हो रहे इस प्रवृति में सकारात्मक बदलाव लाने का एक प्रयास “पंडित श्यामानंद झा स्मृति पाठक सम्मान” के रूप में लालगंज, मधुबनी स्थित यदुनाथ सार्वजानिक पुस्तकालय द्वारा पिछले दो वर्षों से किया जा रहा है | यह सम्मान पुरे एक साल में सर्वाधिक पुस्तक पढने वाले पाठक को ईक्कीस सौ रुपया, अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है | यह सम्मान इस वर्ष लालगंज गाँव निवासी श्री अरविन्द झा की बेटी,  स्नातक की छात्रा सुश्री श्रुति कुमारी को दिया गया है | इस अवसर पर सुश्री श्रुति ने बताया कि वो ‘नेट’ की तैयारी कर रही हैं और गाँव में कोई किताब कि दुकान नहीं है, समुचित साधनों का अभाव है, ऐसे में पुस्तकालय उनके सपनों में नई उड़ान भर दिया है, यहाँ इन्हें किताबें तो उपलब्ध हो ही जाता है साथ ही विद्वतजनों का मार्गदर्शन भी मिलता है |

गौरतलब है कि यह सम्मान लालगंज निवासी शब्द प्रदीपकार हेमपति झा, प्रसिद्ध विकल झा के पुत्र कर्णिका, मधुवीथी, वेदना, सुधावाल्ली आदि कव्यग्रंथ के कृति रचनाकार, विभिन्न मांगलिक अवसर और गीतहारि महिलाओं के कंठ से स्वतःस्फूर्त व्यावहारिक गीतों के ‘बालकवि’, जे.वी.एम्. संस्कृत कॉलेज, मुम्बईक पूर्व प्रधानाचार्य, व्याख्यान वाचस्पति, वैयाकरण पंडित श्यामानंद झा (२७ जुलाई १९०६- ३० अगस्त १९४९ ई.) केर स्मृतिमे उनके जन्मदिन के पावन अवसर पर दिया जाता है |

इस वर्ष के कार्यक्रम का संचालन मैथिलि साहित्य के वरिष्ट समालोचक. ३० से अधिक पुस्तकों के संपादक एवं समीक्षक डॉ. रमानंद झा ‘रमण’ ने किया | कार्यक्रम की शुरुवात पंडित श्यामानंद झा के फोटो पर माल्यार्पण से शुरू हुआ, तत्पश्चात युवा गायक-संगीतकार श्री अभिशेष, मोहम्मद जमाल और आशीषचन्द्र मिश्र ने पंडित जी लिखित शिव-श्रोत का गायन प्रस्तुत किया | इस अवसर पर आस-पास के १०० से अधिक विद्वतजन उपस्थित थे | कार्यक्रम के विशिष्ट अथितियों द्वारा पंडित श्यामानंद झा के कीर्तियों पर प्रकाश डाला गया एवं साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण में पाठक के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गयी | युवा कवि श्री नविन कुमार ‘आशा’ द्वारा काव्य पाठ किया गया | धन्यवाद् ज्ञापन पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री जीवनाथ मिश्र ने किया | इस अवसर श्री किशोर नाथ झा, रामजी ठाकुर, जगदीश मिश्र, अशर्फी कामती, राजनाथ झा, दुर्गानंद झा, शिवशंकर श्रीनिवास, उदय नाथ मिश्र, नीतू कुमारी, शिवानी कुमारी आदि विद्वतजन उपस्थित थे |

 

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